Kumar Vishwas Shayari | कुमार विश्वास शायरी हिंदी

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मेरा जो भी तजुर्बा है, तुम्हे बतला रहा हूँ मैं
कोई लैब छू गया था तब, की अब तक गए रहा हूँ मैं
बिछड़ के तुम से अब कैसे, जिया जाये बिना तरपे
जो मैं खुद ही नहीं समझा, वही समझ रहा हूँ मैं

Kumar Vishwas Shayari

मोहब्बत एक अहसासों की, पावन सी कहानी हैं,
कभी कबीरा दीवाना था, कभी मीरा दीवानी हैं
यहाँ सब लोग कहते हैं, मेरी आँखों में आँशु हैं,
जो तू समझे तो मोती है, जो ना समझे तो पानी हैं ।

भमर  कोई कुमुदनी पर मचल बैठा तो हंगामा
हमारे दिल  में कोई ख्वाब पल बैठा तो हंगामा
अभी तक डूब कर सुनते थे सब किस्सा मोहब्बत का
मैं किससे को हकीकत में बदल बैठा तो हंगामा

kumar vishwas shayari in hindi

कोई खामोश है इतना, बहाने भूल आया हूँ,
किसी की एक त्रनुम  में, तराने भूल आया हूँ
मेरी अब राह मत ताकना कभी ए आसमां वालो
मैं एक चिड़िया की आँखों में, उड़ाने भूल आया हूँ

ना पाने की ख़ुशी है खुश, न खोने की ही कुछ गम है
ये दौलत और ये शौहरत सिर्फ, कुछ जख्मों का मरहम है
अजीब सी कश्मकश है, रोज जीने, रोज मरने में
मुक़्क़मल ज़िंदगी तो है, मगर पूरी से कुछ काम है

पनाहों में जो आया हो, उस पर वार क्या करना
जो दिल हारा हुआ हो, उस  पर फिर से वार क्या करना
मोहब्बत का मजा तो, डूबने की कश्मकश  में है
जो हो मालूम गहराई, तो दरिया पार क्या करना
kumar vishwas shayari

वो जिसका तीर चुपके से जिगर के पार होता है
वो कोई गैर क्या अपना ही रिश्तेदार होता है
किसी से अपने दिल की मोहब्बत तू कहना ना भूले
यहाँ खत भी थोड़ी देर में अखवार होता है

कुमार विश्वास शायरी हिंदी

तुम्हीं पे मरता है ये दिल अदावत क्यों नहीं करता,
कई जन्मों से बंदी है बगावत क्यों नहीं करता,
कभी तुमसे थी जो वो ही शिकायत है ज़माने से,
मेरी तारीफ करता है, मोहब्बत क्यों नहीं करता ।

मेरे जीने मरने में, तुम्हारा नाम आएगा
मैं साँस रोक लू फिर भी, यही इलज़ाम आएगा
हर एक धड़कन में जब तुम हो, तो फिर अपराध क्या मेरा
अगर राधा पुकारेंगी, तो घनश्याम आएगा

kumar vishwas poem

एक पहाड़े सा मेरी उँगलियों पर ठहरा है
तेरी चुप्पी का सबब क्या है ? इसे  हल कर दे
ये फ़क़त लफ्ज़ है तो रोक दे रास्ता इनका
और अगर सच है तो फिर बात मुकम्मल कर दे

सखियों संग रंगने की धमकी सुनकर क्या डर जाऊंगा ?
तेरी गली में क्या होगा ये मालूम है पर आऊंगा
भीग रही है काया सारी खजुराहो की मूरत सी,
इस दर्शन का प्रदर्शन मत करना, वरना मर जाएंगे

Best Kumar Vishwas Shayari

तुम्हारे पास हूँ लेकिन जो दूरी है, समझता हूँ
तुम्हारे बिन मेरी हस्ती अधूरी है, समझता हूँ
तुम्हें भूल जाऊंगा ये मुमकिन है लेकिन
तुम्हीं को  भूलना सबसे ज़रूरी है, समझता हूँ।

तुझ को गुरुर ए हुसन है मुझ को सुरूर ए फन
दोनों को ख़ुदपसंदगी की लत बुरी भी है
तुझ में छुपा के खुद को मैं रख दूँ मगर मुझे
कुछ रख कर भूल जाने की आदत बुरी भी है

तुम्हारे ख़्वाब जैसे गम को अपनाने से डरता है
हमारी आँख की आंशू , ख़ुशी पाने से डरता है
अज़ब है लज़्ज़ते गम भी, जो मेरा दिल कल तक
तेरे जाने से डरता था वो अब आने से डरता है ।

हमें मालूम है दो दिल जुदाई सह नहीं सकते
मगर रस्मे – वफ़ा ये है की ये भी नहीं कह सकते
ज़रा कुछ देर उन साहिलों की चीख सुन भर लो
जो लहरों में तो डूबे है, मगर संग बाह नहीं सकते

kumar vishwas kavita

मिले हर ज़ख्म को मुस्कान को जीना नहीं आया
अमर होना चाहते थे पर ज़हर पीना नहीं आया
तुम्हारी और मेरी दास्तां में फर्क इतना है
मुझे मरना नहीं आया, तुम्हें जीना नहीं आया ।

कोई मंज़िल नहीं जचती, सफर अच्छा नहीं लगता
अगर घर लौट भी आउ तो घर अच्छा नहीं लगता
करूं कुछ भी मैं अब दुनिया को सब अच्छा लगता
मुझे कुछ भी तुम्हारे बिन मगर अच्छा नहीं लगता ।

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